जन्माष्टमी की शुभकामनाये …………….


सदा सर्वात्मभावेन भजनीयो व्रजेश्वर:
करिष्यति स एवास्मदैहिकं पारलौकिकम  (1)

अन्याश्रयो न कर्त्तव्य: सर्वथा बाधकस्तु स:
स्वकीये स्वात्मभावश्च  कर्त्तव्य: सर्वथा सदा (2)

 सबके आत्मा रूप से व्याप्त भगवान श्री कृष्ण का ही सदैव भजन करना चाहिए , वो ही हमलोगों के लौकिक पारलौकिक लाभ सिद्ध करंगे (1) दूसरे का आश्रय नही लेना चाहिए क्योंकि वह सर्वदा बाधक होता है;सदा स्वावलंबी  होकर आत्मभाव का पालन करना चाहिए (2)

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4 responses to this post.

  1. Posted by Apoorv on May 15, 2013 at 2:05 am

    सदा सर्वात्मना कृष्णः सेव्यः कालादिदोषनुत् ।
    तद्भक्तेषु च निर्दोषभावेन स्थेयमादरात् ॥ ३ ॥

    भगवत्येव सततं स्थापनीयं मनः स्वयम् ।
    कालोऽयं कठिनोऽपि श्रीकृष्णभक्तान्न बाधते ॥ ४ ॥

    इन्हें भी हिन्दी में बता दीजिये

    Reply

  2. आपको और आपके परिवार को कृष्ण-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

    Reply

  3. कृष्ण प्रेम मयी राधाराधा प्रेममयो हरी ♫ फ़लक पे झूम रही साँवली घटायें हैंरंग मेरे गोविन्द का चुरा लाई हैं रश्मियाँ श्याम के कुण्डल से जब निकलती हैंगोया आकाश मे बिजलियाँ चमकती हैंश्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

    Reply

  4. आपको और आपके परिवार को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

    Reply

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