रात का सूनापन


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रात का सूनापन

मेरी जिन्दगी को सताए

दिन का उजाला भी

मेरे मन को भरमाये

क्यों इस जिन्दगी में

सूनापन पसर गया

खिलखिलाती ये जिन्दगी

गम में बदल गया

आना मेरी जिन्दगी में तेरा

एक नया सुबह था

वो रात भी नयी थी

वो वक्त खुशगवार था

वो हाथ पकड़ कर चलना

खिली चांदनी रात में

सुबह का रहता था इंतज़ार

मिलने की आस में

पर जाने वो हसीं पल

मुझसे क्यों छिन गया

जो थे इतने पास-पास

वो अजनबी सा बन गया

मेरे अनुरागी मन को

बैरागी बना दिया

रोग प्रेम का है ही ऐसा

कभी दिल बहल गया

कभी दिल दहल गया

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21 responses to this post.

  1. बहुत सुन्दर है

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  2. दिल की गहराइयों से निकले शब्द बहुत खूब बस ….बहुत अच्छा लगा

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  3. प्रेम का रोग है ही ऐसा….सुंदर प्रस्तुति.

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  4. bahut behtAREEn….yun hi likhte rahein…

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  5. शानदार रचना………….बधाई….:)

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  6. सुन्दर रचना ….

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  7. प्रेम के दर्द और विवशता की बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति…..http://sharmakailashc.blogspot.com/

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  8. अच्छी नज़्म …कुछ वर्तनी की गलतियां जरुर हैंसुधारें ….!!

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  9. बहुत अच्छी कविता..अंतिम पंक्तियां बहुत सुंदर हैं

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  10. ana ji bahoot khoob………rat ka sunapan bahoot achchhi prastuti lagi…….

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  11. वो अजनबी सा बन गयामेरे अनुरागी मन कोबैरागी बना दियारोग प्रेम का है ही ऐसाकभी दिल बहल गयाबहुत अच्छी प्रस्तुति। हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है। देसिल बयना – 3"जिसका काम उसी को साजे ! कोई और करे तो डंडा बाजे !!", राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

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  12. वाह! सुन्दर भाव! सुन्दर शब्द विन्यास!

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  13. ANA JI..pyar aur vedna ak doosre ke poorak hain sunder rchna..badhayee

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  14. आना जी प्रेम का ही दूसरा नाम वेदना है ,क्योनी ख़ुशी और गम दोनों मिलते हैं . जो प्रेम की अनुभूति को पा चूका है वो समझ गया इसमें मिले शूल भी फूल से लगते हैं ……… अच्छी अभिव्यक्ति दी है आपने प्रेम की.

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  15. Awesome!!!Bahut hi achha prastutikaran

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  16. अच्छा लेखन ,बधाई ।

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  17. अच्छा लेखन ,बधाई ।

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  18. प्रेम राग को अच्छा समझाया है आपने।

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  19. bahut achhi rachna! badhayee!

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  20. आना जी, दिल को इतना ना दहलाओकी पढने वाले दहल जायेंअच्छी अभिव्यक्ति है डा.राजेंद्र तेला "निरंतर" अजमेर,

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