मनोकामना



तेरी अधरों की मुस्कान
देखने को हम तरस गए
घटाए भी उमड़-घुमड़ कर
यहाँ वहाँ बरस गए

पर तेरी वो मुस्कान
जो होंठों पर कभी कायम था
पता नहीं क्यों किस जहां में
जाकर सिमट गए

तेरी दिल की पुकार
सुनना ही मेरी चाहत है
प्यार की कशिश को पहचानो
ये दिल तुझसे आहत है

मुस्कुराना गुनाह तो नहीं
ज़रिया है जाहिर करने का
होंठो से न सही इन आँखों से
बता दो जो दिल की छटपटाहट

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6 responses to this post.

  1. भावों की बहुत अच्छी अभिव्यक्ति …….

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  2. accha blog hai aur kavitaayen bhi acchi hain. 🙂

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  3. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  4. pyar ke dard ki bahut sundar abhivyakti….http://sharmakailashc.blogspot.com/

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  5. बहुत सुन्दर रचना ………..आपका ब्लॉग अच्छा लगा ….सच है मुस्कुराकर ही इस जिंदगी में दुखो से जीता जा सकता है ………खलील जिब्रान पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया………ये आप की ज़र्रानवाज़ी है की आपने जिब्रान साहब को वो बुलंद दर्जा दिया जिसके की वो हकदार हैं…..आप जैसे कुछ कद्रदानो के लिए ही मैंने खलील साहब पर ये ब्लॉग बनाया है ………उनके विचारों को समझना हर किसी के बस का है भी नहीं………….एक बार फिर आपका शुक्रिया ………करम बनाये रखिये|कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए-http://jazbaattheemotions.blogspot.com/http://mirzagalibatribute.blogspot.com/http://khaleelzibran.blogspot.com/http://qalamkasipahi.blogspot.com/एक गुज़ारिश है …… अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

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  6. बहुत अच्छी अभिव्यकक्ति भावों की…….

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