मेरे इस रेगिस्तान……………


मेरे इस रेगिस्तान मन में
 बूँद प्यार का गर टपक जाए
  रेत गीली हो जाय
   दिल का दामन भर जाय

    जन्मों से प्यासे इस मन को
     प्यार का जो सौगात मिला
      मन पंछी बन उड़ जाए
       रहे न जीवन से गिला

        जाने क्यों मन भटका जाय
         ढूंढे किसे ये          है आवारा बादल की तलाश
           पाकर मन कहे ‘मै हारा’

             इतना प्यार उड़ेलूँ उसका ..
              आवारापन संभल जाए
               वो बूँद बन जाए बादल का
                और इस सूखे मन में टपक जाए

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4 responses to this post.

  1. beautiful poem mam…

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  2. beautiful poem with awesome thoughts… well execution…

    Reply

  3. प्रशंसनीय रचना – बधाईसुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।

    Reply

  4. बहुत अच्छी कविता है।पढकर बहुत अच्छा लगाहमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।मालीगांव सायालक्ष्य

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