वो लम्हे …


वो लम्हे ….
जो साथ गुज़ारे थे 
ख्वाब सजाये थे 
नींद उडायी थी
याद तो है न!
………
वो प्यार……..
जिसे लम्हों ने सींचा था 
पलकों पर सजाया था 
उसके खुशबू के दामन से 
जीवन महकाया था 
याद तो है न!
………..


वो दिन……..
जीने मरने की हम 
कसमे जो खाते थे 
साथ न छोड़ेंगे 
कहते न थकते थे 
याद तो है न!
…………..
फिर क्यों …….
ये दूरी मजबूरी 
धागे रिश्तो के ये 
टूटी ..जो न फिर जुड़ी
आखिर भूल ही गए न !!!!!

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11 responses to this post.

  1. bahut sunder

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  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  3. achche nagme hai.

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  4. बहुत सुंदर अभिवयक्ति| धन्यवाद|

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  5. बेहद खूबसूरत…. दिल को छू गई यह कविता…

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  6. बहुत सुन्दर,,,

    Reply

  7. सुन्दर अतिसुन्दर अभिव्यक्ति ,बधाई

    Reply

  8. दिल को छू लेने वाली कविता हैं,सचमुच बहुत सुन्दर बात कही हैं अपने.

    Reply

  9. बहुत सुंदर अभिवयक्ति….

    Reply

  10. सुन्दर … बधाई

    Reply

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