गुहार


मेरे घर के आगे है पथरीली ज़मीन
हो सके तो आओ इन पत्थरों पर चलकर


पूनम की चाँद ने रोशनी की दूकान खोली है
खरीद लो रोशनी ज़िंदगी रोशन कर लो


गीली मिटटी है न चलो इतना
की कदमों के निशाँ को मिटा न पाऊँ
आखिर किसी को पता न चले
यहाँ रास्ता मेरे घर से होकर गुज़रता है

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12 responses to this post.

  1. bahut khub……….

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  2. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ….

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  3. किसी को पता न चलेयहाँ रास्ता मेरे घर से होकर गुज़रता है"bahut khoob मेरे घर के आगे है पथरीली ज़मीनहो सके तो आओ इन पत्थरों पर चलकरman ko bha gayi .

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  4. आखिर किसी को पता न चलेयहाँ रास्ता मेरे घर से होकर गुज़रता हैबहुत बढ़िया! विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  5. bahut khoob…inhi pattharon pe chal kar chalo aa sako to aao,mere ghar ke raaste mein koyi kahkashan nahin hai…

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  6. बहुत बढ़िया.

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  7. बहुत खूब …. ।

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  8. बहुत खूबसूरत शेर ……

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  9. वाह ! जी,इस कविता का तो जवाब नहीं !

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  10. पूनम की चाँद ने रोशनी की दूकान खोली हैखरीद लो रोशनी ज़िंदगी रोशन कर लोअच्छी पंक्तियाँ हैं|

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  11. मेरे घर के आगे है पथरीली ज़मीनहो सके तो आओ इन पत्थरों पर चलकरbahut sundar

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  12. "किसी को पता न चलेयहाँ रास्ता मेरे घर से होकर गुज़रता है"बहुत ही बढ़िया.सादर

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