बात …दिल की


घुप्प रात का अँधेरा 
परछाई का नहीं नामोनिशाँ
फिर ये साया कौन? 
जो मेरा हमराही है बन रहा 


तुझसे बिछड़कर मरने का 
कोई इरादा तो नही 
इश्क किया है तुझसे 
पर इतना बेपनाह तो नही 


एकटक सितारों को क्यों देखते हो 
इन सितारों से मिलने का तमन्ना तो नहीं ?
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15 responses to this post.

  1. अच्छा लिखा । मिलने का तमन्ना के बजाय मिलने की तमन्नाकर लिया जाय ।

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  2. bhut hi sunder abhiyakt…

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  3. beautiful poem …….

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  4. sunder abhivyakti.

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  5. bahut sundar………..

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  6. बहुत बढिया !!

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  7. बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  8. अच्छी रचना

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  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  10. सुंदर अभिव्यक्ति।

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  11. बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

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  12. वाह सुंदर छोटी सी बात

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  13. तुझसे बिछड़कर मरने का कोई इरादा तो नही इश्क किया है तुझसे पर इतना बेपनाह तो नही बेपनाह इश्क तो अब किताबी बातें हैं..:)

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  14. kaun hai jo sitaron se milnaa nahee chaahtaaunkmein nirantar khonaa nahee chaahtaa ver nice

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