द्रौपदी





 एक नारी के मन की –
व्यथा हो तुम 
धूलिसात अभिमान  का 
प्रतीक हो तुम 
रिश्तों में छली गयी 
नारी हो तुम 
पर निष्ठुर  भाग्य को धता 
देती हो तुम 
अंतस  की  पीड़ा  का 
आख्यान हो तुम
द्युतक्रीडा के परिणाम का 
व्याख्यान हो तुम 
भक्ति की पराकाष्ठा  को 
छूती हो तुम  
एक अबला की सबल –
गाथा हो तुम 
मर्यादित रिश्तों की 
भाषा हो तुम 
एक सुलझी हुई नारी की 
पहचान हो तुम 

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13 responses to this post.

  1. ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. जो धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.इस ब्लॉग पर आने से हिंदुत्व का विरोध करने वाले कट्टर मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष { कायर} हिन्दू भी परहेज करे.समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य देदेशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच – हल्ला बोलहल्ला बोल के नियम व् शर्तें

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  2. एक नारी के मन की -व्यथा हो तुम रिश्तों में छली गयी नारी हो तुम सार्थक रचना..!!

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  3. बहुत ही बढ़िया! जितनी तारीफ की जाये कम है! विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  4. सुन्दर रचना

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  5. सार्थक अभिव्यक्ति!

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  6. बहुत सुन्दर और सार्थक रचना..

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  7. मर्यादित रिश्तों की भाषा हो तुम एक सुलझी हुई नारी की पहचान हो तुम नारी जीवन का सार्थ …प्रभावी रचना

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  8. अति उत्तम…इस संवेदनापूर्ण पोस्ट के लिए मेरी ओर से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं…

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  9. द्युतक्रीडा के परिणाम का व्याख्यान हो तुम भक्ति की पराकाष्ठा को छूती हो तुम एक अबला की सबल -गाथा हो तुम sach me …………bilkul sach!

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  10. नारी के व्यक्तिव की पीड़ा, सहनशीलता और आचरण को भावपूर्ण रूप से व्यक्त किया है इस कविता में…

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  11. नारी के व्यक्तिव की पीड़ा, सहनशीलता और आचरण को भावपूर्ण रूप से व्यक्त किया है इस कविता में…

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  12. एक अबला की सबल -गाथा हो तुम मर्यादित रिश्तों की भाषा हो तुम एक सुलझी हुई नारी की पहचान हो तुम bahut sahi chitran

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  13. भक्ति की पराकाष्ठा को छूती हो तुम एक अबला की सबल -गाथा हो तुम मर्यादित रिश्तों की भाषा हो तुम एक सुलझी हुई नारी की पहचान हो तुम नारी जीवन के सन्दर्भों को उद्घाटित करती हुई रचना ….आपने बखूबी उसकी भावनाओं और संवेदनाओं का चित्र खींचा है ….द्रोपदी जैसे प्रतिक के माध्यम से ……आपका आभार !

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