चादर पर पड़े …….



चादर पर पड़े सिलवटों की भी जुबां होती है
कभी प्यार तो कभी ग़म की कहानी कहती है


रेत गीली कर जाती है जो तूफ़ानी समंदर
वो समुंदर भी आंसुओं से ही नमकीन होती है


मिटटी की सोंधी खुशबू ने जिन फिज़ाओं को महकाया है
उन फिज़ाओं में ही  पतझड़ की कहानी होती है


पानी के बुलबुले को भूल से मुहब्बत मत समझो
इन बुलबुलों में बेवफाई की दास्ताँ होती है 
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16 responses to this post.

  1. सुन्दर अभिब्यक्ति ….

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  2. अनामिका जी सुन्दर रचना -भाव भाव बहुत प्यारे पर जैसा की हमने पहले भी आप का ध्यान जागरण जंक्सन पर भी दिलाया था स्त्रीलिंग और पुल्लिंग का ध्यान रखा कीजिये भाव और रचना तब और खूबसूरत बन जाये कृपया निम्न सुधारें रेत गीला कर जाता है जो तूफ़ानी समंदरवो समुंदर भी आंसुओं से ही नमकीन होता हैशुक्ल भ्रमर ५

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  3. बहुत अच्छे भाव लिए हुए है आपकी ये रचना

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  4. –सुन्दर नज़्म भाव पूर्ण…"वो समुंदर भी आंसुओं से ही नमकीन होती है.." —क्रपया लिन्ग का ध्यान रखें…समन्दर के लिये..होता है.. होना चाहिये…

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  5. सम्पूर्ण रचना बहुत अच्छी लगी|धन्यवाद|

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  6. पानी के बुलबुले को भूल से मुहब्बत मत समझोइन बुलबुलों में बेवफाई की दास्ताँ होती हैसुन्दर लिखा है .

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  7. कोमल अहसासों से सने शब्द बधाई

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  8. सलवटों की जुबां….वाह भई समझने की बात है सम्पूर्ण रचना बहुत अच्छी लगी

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  9. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  10. मिटटी की सोंधी खुशबू ने जिन फिज़ाओं को महकाया हैउन फिज़ाओं में ही पतझड़ की कहानी होती हैबेहद प्रभावशाली रचना। आभार।

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  11. atyant sundar kaavya……..waah !

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  12. इस कविता का तो जवाब नहीं !

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  13. मिटटी की सोंधी खुशबू ने जिन फिज़ाओं को महकाया हैउन फिज़ाओं में ही पतझड़ की कहानी होती हैबहुत खूब कहा आपने. बधाई दुनाली पर स्वागत है-ओसामा की मौत और सियासत पर तीखा-तड़का

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  14. चादर पर पड़े सिलवटों की भी जुबां होती है— vaah bahut khoob sabhee paMMktiyaaMM bahut acchee lagee| aabhaara|

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  15. बहुत कोमल मासूम से एहसास

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