इन पीले पत्तों को …..



इन पीले पत्तों को 
कभी गिरते हुए 
देखा है 


सुखी पत्ती घुमती
 हुई ,धरती को 
छूतीहै 


धरती के आगोश 
में समाने को 
उत्सुक है 
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क्यों न हो आखिर 
उसे खाद बनना है 


एक और पेड़ जनना है 
घोंसलों में नींव बनना है 
चिड़ियों को बचाना है 
गिलहरियों का बिछोना है 

इन पत्तियों को 
यूं ही बर्बाद 
न होने दो 


इन्हीं पत्तियों से 
धरती को आबाद 
करना है 
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15 responses to this post.

  1. कई सारे सन्देश देती यह अर्थपूर्ण कविता दिल को छू गयी है | पर्यावरण के बारे में और पीले पत्तों के माध्यम से बुजुर्गो के बारे में कितना सटीक कहा है आप ने !

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  2. पीले पत्‍तों के बहाने कितना कुछ कह दिया आपने। सुन्दर रचना|

    Reply

  3. सुन्दर रचना

    Reply

  4. Behad arthpurn..sundar kavita…aabhar…

    Reply

  5. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें चर्चा मंच

    Reply

  6. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण कविता!

    Reply

  7. हम भी जब अवसान की ओर जाते हैं तो कुछ इसी तरह झूमना चाहिए। हालांकि अमूमन ऐसा हो नहीं पाता। अच्छी कविता के लिए बधाई स्वीकार करें।

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  8. waah! gahan chintan karati rachna…

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  9. इन्हीं पत्तियों से धरती को आबाद करना है अति सुंदर,बधाई हो आपको – विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  10. इन्हीं पत्तियों से धरती को आबाद करना है बेहद भावपूर्ण शब्द

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  11. पीली और सूखी ये पत्तियां भी कितने काम की हैं…

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  12. बहुत ही अच्छे शब्द है !अपना महत्वपूर्ण टाइम निकाल कर मेरे ब्लॉग पर जरुर आए !Free Download Music + LyricsFree Download Hollywwod + Bollywood Movies

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  13. इन पत्तियों को यूं ही बर्बाद न होने दो इन्हीं पत्तियों से धरती को आबाद करना है sahi kaha

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