तेरा आना……


                  
वक्त बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है
यादों के सागर में डूबना अच्छा लगता है 
चुटकियों में दिन गुज़रकर शाम जो हो जाती है 
तेरी यादों में तारे गिनना भी अच्छा लगता है ||
ये यादें भी बेमुरव्वत बेवफा होती है 
कभी आती है तो कभी गुम हो जाती है 
नफरत है तेरी यादों से जो रुला जाए बार बार 
पर मरहम भी तो दिल को तेरी याद ही लगाती है ||
वजह यही है तेरी यादों को सजोने का 
एक बेवफा  के प्यार को ज़ुदा न करने का 
रौशनी तले अँधेरा है ये मेरा दिल भी जाने 
पर कोशिश है अँधेरे में दिया जलाने का ||

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11 responses to this post.

  1. पर मरहम भी तो दिल को तेरी याद ही लगाती है ||bahut achha laga aapko padhna.shubhkamnayen

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  2. वक्त-बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है।बहुत अच्छा लिखा है।मेरी कविता अच्छा लगता है पढियेगाअच्छा लगेगा।मेरे ब्लाग पर आने के लिये धन्यवाद।

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  3. yaadein , bahut sunder

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  4. रौशनी तले अँधेरा है ये मेरा दिल भी जाने पर कोशिश है अँधेरे में दिया जलाने का ||रंग लाती कोशिश ….

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  5. very very nice ANA ji .

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  6. behteen rachnakabhi hamare blog par bhi aayewww.deepti09sharma.blogspot.com

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  7. Kitni khubsurat yaadein hai , waah wakai behtreen parastuti

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  8. वक्त बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है…बहुत ही खूबसूरत भाव हैं…

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  9. bahut hi kub

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