चुप-चुप है …………..


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चुप-चुप है मौन प्यार ,खिल खिल जाए बहार
जब जब होवे दीदार ,तुम बस कोई नहीं


ये क्या मौसम का हाल ,क्या है ये वक्त की चाल
क्यों है इश्क में बेहाल ,हम-तुम और कोई नहीं


कशमकश मेरे मन में,समाई हो तुम धड़कन में
टूट न जाए ये बंधन ,तेरे बगैर बस कोई नही


धरती चाँद और ये गगन ,कर दूं मैं तुझे समर्पण 
सूना था दिल का आँगन ,तुम-ही-तुम कोई नही 

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12 responses to this post.

  1. वाह! एक और जोड़िए।

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  2. धरती चाँद और ये गगन ,कर दूं मैं तुझे समर्पण सूना था दिल का आँगन ,तुम-ही-तुम कोई नही सुन्दर समर्पण

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  3. आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद ……स्वागत है आपका

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  4. खूबसूरत.

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  5. अद्भभुत भावों से भरी रचना, विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  6. चुप-चुप है मौन प्यार ,खिल खिल जाए बहारजब जब होवे दीदार ,तुम बस कोई नहीं..बढ़िया खूबसूरत अन्दाज में रची रचना ..

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  7. सुंदर भाव….

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  8. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  9. कशमकश मेरे मन में,समाई हो तुम धड़कन मेंटूट न जाए ये बंधन ,तेरे बगैर बस कोई नहीWah …

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  10. सुन्दर गीत !

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  11. बहुत ही खुबसूरत प्यार की अभिवयक्ति….

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