भाई-बहन के आपसी सद्भाव को बढ़ाती रक्षाबंधन के पर्व पर प्रस्तुत है भाव पूर्ण गीत



अब  के  बरस भेज  भइया  को  बाबुल 

सावन ने लीजो बुलाय रे
लौटेगी जब मेरे बचपन की सखियाँ
देजो सदेशा भिजाय रे
अब के बरस भेज भइया को बाबुल ...

अम्बुवा तले फिर से झूले पड़ेगे
रिमझिम पड़ेगी फुहारे
लौटेगी फिर तेरे आँगन में बाबुल
सावन की ठंडी बहार रे
छलके नयन मोरा कसके रे जियरा
बचपन की जब याद आए रे
अब के बरस भेज भइया को बाबुल ...

बैरन जवानी ने छीने खिलौने
और मेरी गुडिया चुराई
बाबुल की मै तेरे नाजो की पाली
फिर क्यों हुई मै पराई
बीते रे जग कोई चिठिया न पाती
न कोई नैहर से आये , रे
अब के बरस भेज भइया को बाबुल ...
पेश है एक और भावपूर्ण गीत

Advertisements

3 responses to this post.

  1. बहुत अच्छा लोकगीत प्रस्तुत करने के लिये वधाई।

    Reply

  2. आपने बहुत ही भावुक रचना लिखी है . अबकी बरस भैया जरुर आयेंगे. रक्षाबंधन की शुभकामनाये.

    Reply

  3. rakhi ke avsar par steek geet ka chayan , badhai

    Reply

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: