सुन लो ……….



सुन लो नभ क्या कहता है
धरती में पडा सन्नाटा  है,
असंख्य तारों की बातें
कोई नहीं सुन पाता है


व्यथा है इनकी भी- सुध  लो
आती रोशनाई को धर लो
हो सकता है धरती  की कोई
व्यथा है कहती  है-सुन लो


ऊपर  गगन है नीचे जन
भ्रष्ट तंत्र  -भूखे  जन-गण
नेताओं की लूट कथा को
बांच  रही नभ कर-कर वर्णन


 जन-जन अब  होकर जागृत
करने  न देंगे …कुकृत्य
बरसेगा  घनघोर घटा
भर भर लेकर  बूँद अमृत



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7 responses to this post.

  1. आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (६) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /आप हिंदी के सेवा इसी तरह करते रहें ,यही कामना हैं /आज सोमबार को आपब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /

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  2. बहुत सुन्दर रचना, सार्थक और खूबसूरत प्रस्तुति .

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  3. सार्थक और सटीक भाव लिए हुए सुंदर रचना, बधाई …..

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  4. सटीक व सार्थक रचना।

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  5. जन-जन अब होकर जागृतकरने न देंगे …कुकृत्यबरसेगा घनघोर घटाभर भर लेकर बूँद अमृतसही और सार्थक कविता ……..

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  6. बेहतरीन कथन अमृत जरूर बरसेगा

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