जाने क्यों…





जाने क्यों ये
दिल रोता है ,

जीवन में सब
 कुछ धोखा है, 
चुपके से आना
दिल में समाना-
महकती पवन
 का झोंका है |

अनजान पल जो
 ढल गए कल,
रंग बदल मन-
 को गए छल,
वक्त के साथ
 रहे है गल,
बेवफाई ये
 अपनों का है |

राह वही,
वही है सफ़र ,
तेरा साथ 
नहीं है मगर ,
बिन तेरे- 
मेरे हमसफ़र 
टूटा सपनों का
 झरोखा है 

जाने क्यों ये
 दिल रोता है ,

जीवन में सब कुछ
 धोखा है, 




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13 responses to this post.

  1. वाह …बहुत ही बढि़या ।

    Reply

  2. तुक की अपेक्षा शब्‍द संयोजन और अर्थ को संभालना ज्‍यादा श्रेयस्‍कर रहता है जि‍न्‍दगी का शॉट

    Reply

  3. सबसे पहले हिंदी दिवस की शुभकामनायें /विरह वेदना को उजागर करती हुई सुंदर शब्दों मैं लिखी शानदार रचना बहुत बधाई आपको /मेरी नई पोस्ट हिंदी दिवस पर लिखी पर आपका स्वागत है /http://prernaargal.blogspot.com/2011/09/ke.html

    Reply

  4. सुंदर प्रेमाभिव्यक्ति.वाह !!

    Reply

  5. बिन तेरे- मेरे हमसफ़र टूटा सपनों का झरोखा है …बहुत मर्मस्पर्शी भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

    Reply

  6. तू है तो सब हैतू नहीं तो कुछ भी नहीं…

    Reply

  7. जीवन में सब कुछ धोखा है…वाह…बढ़िया रचना… सादर….

    Reply

  8. बहुत ही बढ़िया। ——कल 14/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

    Reply

  9. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी हैतेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों सेअवगत कराइयेगा ।http://tetalaa.blogspot.com/

    Reply

  10. वाह …बहुत ही बढि़या ।

    Reply

  11. सुन्दर अभिव्यक्तिप्रेमपुर्ण रचनाआभार

    Reply

  12. जाने क्यों येदिल रोता है ,जीवन में सब कुछ धोखा है, बहुत सुन्दर रचना , सुन्दर भावाभिव्यक्ति , बधाई आभार कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .

    Reply

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