क्या खोया क्या पाया जग में,…(Samvedna-Atal Bihari Vajpayee 2002)


[LyricsMasti] Lyrics of Kya Khoya Kya Paya (Samvedna-Atal Bihari Vajpayee 2002)

क्या खोया क्या पाया जग में,
मिलते और बिछड़ते मग में,
मुझे किसी से नहीं शिकायत,
यधपि छला गया पग-पग में,
एक दृष्टि बीती पर डालें,
यादों की पोटली टटोलें,
जन्म मरण का अविरत फेरा,
जीवन बंजारों का अविरत डेरा,
आज यहाँ कल वहाँ कूच है,
कौन जानता किधर सवेरा,
अंधियारा आकाश असीमित,
प्राणों के पखों को तौलें,
अपने ही मन से कुछ बोलें,




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6 responses to this post.

  1. कविवर अटल बिहारी वाजपेयी के सम्पूर्ण कविताओं का संग्रह है मेरे पास ,मै अक्सर पढ़ कर प्रेरणा प्राप्त करता हूँ । आज आपके इस सुन्दर प्रस्तुति से मन गद -गद हो उठा , आपको बहुत शुभकामनाएँ …

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  2. Hi, after reading this awesome piece of writing i am too happy to share my knowledge here with mates.Here is my web sitehttp://wifesharing.sexusblog.com

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  3. बहुत खूब …शुभकामनायें आपको !

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  4. सम्माननीय अटल जी का सुन्दर गीत पढ़कर बहुत अच्छा लगा |प्रस्तुतिके लिए आभार

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  5. अटल जी एक कुशल राजनेता के साथ संवेदनशील कवि हैं…..उनकी इस सुन्दर कविता को पुनः पढवाने के लिये आपका आभार…सादर…

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  6. इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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