वक़्त गुज़रा हुआ


तू है वक़्त गुज़रा हुआ 
मुरझाया फूल किताबों में रखा 
तुझे न याद करूँ एक पल से ज्यादा 
कि दिल में तू नहीं अब कोई और है 


तुम से खिला करती थी जो बगिया 
इंतज़ार में पल गिनता था ये छलिया 
अब उन लम्हों में खुशबू बिखेरा जिसने 
वो अब तुम नहीं कोई और है 


ख़्वाबों में, नींदों में, ख्यालों में नहीं तुम 
राह पर, मोड़ पर , धडकन में नहीं तुम 
अब रात गुज़रती है जिनके अरमान लिए 
वो अरमान नहीं तुम ..कोई और है 


वो जो है मेरी आज की ख्वाहिश 
उसका सदका उतार दूं न रहे खलिश 
बिछड़ने का डंक डसा था जिसने 
वो कोई और नहीं वो तू ही है 

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22 responses to this post.

  1. bahut sundar abhivyakti, badhai.

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  2. बहुत खूब .. सहमत हूँ की सूखे फूलों को निकाल फैंकना चाहिए ..

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  3. पहली दफा आपके ब्लॉग पर आया हूँ.आपकी खूबसूरत भावपूर्ण प्रस्तुति पढकर मन मग्न हो गया है.मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

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  4. लोकतंत्र के चौथे खम्बे पर अपने विचारों से अवगत कराएँ । औचित्यहीन होती मीडिया और दिशाहीन होती पत्रकारिता

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  5. ख़्वाबों में, नींदों में, ख्यालों में नहीं तुम राह पर, मोड़ पर , धडकन में नहीं तुम अब रात गुज़रती है जिनके अरमान लिए वो अरमान नहीं तुम ..कोई और है खूबसूरत सा एहसास जो हैवो तुम नहीं…..!!

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  6. सुन्दर प्रस्तुति

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  7. इतनी तोहमतें पर इतनी ही यादें सुन्दर रचना

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  8. बढ़िया रचना….सादर…

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  9. सुंदर रचना!

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  10. बहुत अच्छे भाव,बधाई !

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  11. वाह …बहुत खूब शब्‍द दिये हैं आपने गुजरे हुए वक्‍त को …कल 16/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है। धन्यवाद!

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  12. वक़्त गुजरा हुआ तू नहीं कोई और है …बेहतरीन !

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  13. शानदार रचना….बहुत खूब!!

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  14. khubsurat ehsaas….

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  15. सुंदर रचना। गहरे अहसास। साथ में तस्‍वीर गजब की।

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  16. शानदार रचना Gyan Darpan.

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  17. बहुत खूब. क्या शानदार रचना है. सादर

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  18. अब रात गुज़रती है जिनके अरमान लिए वो अरमान नहीं तुम ..कोई और है गजब का लिख हैं मुबारक हो

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  19. तू है वक़्त गुज़रा हुआ मुरझाया फूल किताबों में रखा तुझे न याद करूँ एक पल से ज्यादा कि दिल में तू नहीं अब कोई और है… bhaut hi khubsurat…. rachna…

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  20. kismat teree kharaab hai ab koi aur mere saath haibahut khoob rajendra ji

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  21. bahut badhiyaa anajiतू है वक़्त गुज़रा हुआ मुरझाया फूल किताबों में रखा तुझे न याद करूँ एक पल से ज्यादा कि दिल में तू नहीं अब कोई और हैkismat teree kharaab hai ab koi aur mere saath hai

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