रिश्तो को गहराने दो


धीरे धीरे रूहानी  रिश्तो को गहराने दो 
शाख से जुड़े कच्चे  लम्हों को पक जाने दो 


परिंदों का उड़ना ही  था की पर काट दिए 
चिंगारी को ज़रा सा उड़ने की खुमारी दे दो 


लम्हे गिरेंगे शाख से जब पक जायेंगे ये कच्चे पल
संभालना है मुझे तारीखों में बसे पके हुए कल


फिर ये कैसा ठहराव है इस वीरान जिंदगानी में 
इन प्यार के कतरों को दरियाई गहराई दे दो 

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10 responses to this post.

  1. फिर ये कैसा ठहराव है इस वीरान जिंदगानी में इन प्यार के कतरों को दरियाई गहराई दे दो बहुत सुन्दर

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  2. बहुत उम्दा!!

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  3. लम्हे गिरेंगे शाख से जब पक जायेंगे ये कच्चे पलसंभालना है मुझे तारीखों में बसे पके हुए कलसुन्दर भाव…….

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  4. rishte gahre huye binaa ruhaani nahee hotesab rishton se upar hote

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  5. गहरे अहसास…. सुंदर रचना।

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  6. धीरे धीरे रूहानी रिश्तो को गहराने दो शाख से जुड़े कच्चे लम्हों को पक जाने दोबेहतरीन रचना

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  7. फिर ये कैसा ठहराव है इस वीरान जिंदगानी में इन प्यार के कतरों को दरियाई गहराई दे दो…. बेहतरीन शब्द रचना…..

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  8. फिर ये कैसा ठहराव है इस वीरान जिंदगानी में इन प्यार के कतरों को दरियाई गहराई दे दो गजब की सोंच क्या बात है बधाई ……

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