ईमान क्यों है गड़बड़ाया


ईमान क्यों है गड़बड़ाया
 तेरी सूरत देखकर
किताब में रक्खे  फूल भी
ताजगी दे गयी महककर


दिल-ए-दास्ताँ जो कभी
बंद थी किताब में
शोखियाँ और बांकपन सब
छुप गया था नकाब में


फिर क्यों  ले जाए हमें
बहारों के शबाब में
सुर फिर से क्यों बजे
 सुरीली रबाब में



क्यों फिर से ज़िन्दगी के
कैनवस में रंग दिख गये 
क्यों फिर से सूखे  गुलाब
किताबों के बीच  महक गये 


ईमान फिर से गड़बड़ाया
तेरी सूरत देखकर
फिर से क्यों सूखे फूल
ताजगी दे गयी महककर





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17 responses to this post.

  1. ईमान फिर से गड़बड़ायातेरी सूरत देखकरफिर से क्यों सूखे फूलताजगी दे गयी महककर .very nice

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  2. क्यों फिर से ज़िन्दगी केकैनवस में रंग दिख गये क्यों फिर से सूखे गुलाबकिताबों के बीच महक गये badhai bahut hi sundar pravishti…. abhar.

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  3. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति । मेरा शौकमेरे पोस्ट में आपका इंतजार हैआज रिश्ता सब का पैसे से

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  4. ati sundar…

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  5. शुक्रिया आपका एक नया अहसास दिया आपने जहन से पर्दा उठाया आपने ज़िन्दगी जीने का मकसद समझाया आपने फिर से हँसने का रास्ता दिखाया आपने ग़मों में डूबे रहने का सबब बताया आपनेगिर कर उठने का तरीका सिखाया आपनेशुक्रिया आपका सूखे लबों को फिर से थिरकाया आपने निरंतर रोते हुए को हँसाया आपने

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  6. फिर क्यों ले जाए हमेंबहारों के शबाब मेंसुर फिर से क्यों बजे सुरीली रबाब मेंवाह

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  7. क्यों फिर से ज़िन्दगी केकैनवस में रंग दिख गये क्यों फिर से सूखे गुलाबकिताबों के बीच महक गये खूबसूरत एहसास…!!

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  8. सुंदर रचना …

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  9. वाह बहुत खूब.

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  10. प्यारी कविता है ,भाषा सरल और सहज है

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  11. बेहद खुबसूरत लिखा है |

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  12. ईमान फिर से गड़बड़ायातेरी सूरत देखकरफिर से क्यों सूखे फूलताजगी दे गयी महककर गजब के जज्‍बात।सुंदर रचना।

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  13. अच्छी रचना

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  14. Hi…Priyatam tere saath hi rahta…Rahta hai tere khwabon main….Uske hone se hi khush ho…Mahke phool kitabon main….Sundar kavita…mahakti hui…Deepak..

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  15. भाव तो अच्छे हैं… किन्तु-किन्तु…कई बार एक ही बात लिखी गयी है, लिखने से रोक नही प रहा… अन्यथा ना लें…

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