मेरे रीतापन….




मेरे रीतापन को लेकर 
 एकाकी जीवन है मेरा 
  जैसे बिना कुहक चिड़ियों की 
निस्तब्ध वन है सारा 


उठ  जाती हूँ रातो को सुनकर 
अकस्मात्, ये ध्वनि है क्या
अरे! ये तो जानी पहचानी सी 
रूदन  है मेरा 


पक्की दीवारों से घिरी 
इन कमरों की गुंजन को 
मन की कच्ची दीवारें भी 
सुनता नहीं इस धड़कन को 


डायरी के पन्ने सारे 
भर गए तेरे यादों से 
नीदों से तो टूटा नाता 
जुड़ गया नाता तारों से 


चंद सवाल रह जाते मन में 
कब तक इस रीता मन को 
लेकर चलती रहूँ मै साथ 
दिन ज़िन्दगी  के कम है जो 




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13 responses to this post.

  1. dard-ae-dil bayan kiyaa hai aapne akelepan kaa ahsaas dilaayaa aapne

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  2. पहली बात ऊपर का क्लौक – बहुत अच्छा लगा।दूसरी बात कविता के ऊपर दिया गया चित्र – लाजवाब है, कविता के भाव को खोलकर रख देता है।और कविता — मन के अहसास को गहरे से मन में उतार देता है।

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  3. Bahut khoob bhav

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  4. शाद इसी का नाम ज़िंदगी है …

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  5. "चंद सवाल रह जाते मन में कब तक इस रीता मन को लेकर चलती रहूँ मै साथ दिन ज़िन्दगी के कम है जो" भावपूर्ण…..

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  6. जिंदगी के खालीपन और दर्द को बखूबी शब्दों में उतार दिया है आपने …

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  7. चंद सवाल रह जाते मन में कब तक इस रीता मन को लेकर चलती रहूँ मै साथ दिन ज़िन्दगी के कम है जो….man ke bhaavo ko shabdo me utar diya aapne….

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  8. डायरी के पन्ने सारे भर गए तेरे यादों से नीदों से तो टूटा नाता जुड़ गया नाता तारों से bahut sundar panktiyan.bahut achchi rachna.nav varsh ki shubhkamnayen.

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  9. सुंदर भावभरी रचना।

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  10. दस दिनों तक नेट से बाहर रहा! केवल साइबर कैफे में जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन आज से मैं पूरी तरह से अपने काम पर लौट आया हूँ!नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

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  11. .एक अतिसंवेदनशील रचना जो निशब्द कर देती है

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  12. अना जी, विशेष भावों से एवं शब्दों से सुसज्जित एवं सार्थक रचना हेतु हार्दिक बधाई……ये नव – वर्ष आप एवं आपके परिवार लिए विशेष सुख – शांतिमय, हर्ष – आनंदमय, सफलता – उन्नति – यश – कीर्तिमय औरविशेष स्नेह – प्रेम एवं सहयोगमय हो !!!!

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