दिल की तरकीब




दिल की तरकीब खास कुछ काम न आ या
न दिल को मिला सुकून न मन को चैन आया


दिल लहूलुहान  हुआ आँखे रो रो कर रात काटे
चाहत आपने ही थी जताई  नाहक हमें बदनाम किया




कदमो को हमने है रोका नज़रों को समेटा है हमने 
ख़त के पुर्जे में भी आखर मिटाया है हमने 


उलझ रही है सीने में कोई नज़्म मिसरा या दोहा 
कोरे कागज़ पर लिखा नाम मिटाया है हमने 


रेत का महल ले डूबा समंदर और अब बारिश की बारी है  
ज़ख्मों का जो सिला दिया तूने वह सिलसिला अब भी जारी है 

  

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17 responses to this post.

  1. दिल लहूलुहान हुआ आँखे रो रो कर रात काटेचाहत आपने ही थी जताई नाहक हमें बदनाम कियाकदमो को हमने है रोका नज़रों को समेटा है हमने ख़त के पुर्जे में भी आखर मिटाया है हमने Ana ji bahut hi sundar aur gahari anubhuti ko samet rahi hain aap …sadar badhai ….aur han ak arsa ho gaya apko mere blog pr aaye huye…meri ak rachana Meet bn ke kahani buno to sahi me apne meri hr rachana padhane ka vada kiya tha ….vada yad dilana mera farj tha..

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  2. bahut khoobsurat likha hai!amitaag.blogspot.com

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  3. बहुत ख़ूबसूरत एवं लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है ! बधाई !

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  4. komal dil se likhi khubsurat abhivyakti wali rachna…

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  5. दिल लहूलुहान हुआ आँखे रो रो कर रात काटेचाहत आपने ही थी जताई नाहक हमें बदनाम किया HR SHER LAJBAB HAI ANA JI ….BAHUT UMDA…BADHAI SWEEKAREN …AUR HAN MERE NAYE POST PR AP KB AYENGI….BESABRI SE INTJAR HAI.

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  6. दिल लहूलुहान हुआ आँखे रो रो कर रात काटेचाहत आपने ही थी जताई नाहक हमें बदनाम किया HR SHER LAJBAB HAI ANA JI ….BAHUT UMDA…BADHAI SWEEKAREN …AUR HAN MERE NAYE POST PR AP KB AYENGI….BESABRI SE INTJAR HAI.

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  7. रेत का महल ले डूबा समंदर और अब बारिश की बारी है ज़ख्मों का जो सिला दिया तूने वह सिलसिला अब भी जारी है अच्छी प्रस्तुति

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  8. सुंदर रचना।

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  9. उलझ रही है सीने में कोई नज़्म मिसरा या दोहा कोरे कागज़ पर लिखा नाम मिटाया है हमने …उनका मान लिखना भी तो किसी शेर से कम नहीं … वाह … गज़ब का शेर है …

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  10. रेत का महल ले डूबा समंदर और अब बारिश की बारी है ज़ख्मों का जो सिला दिया तूने वह सिलसिला अब भी जारी है गहरे अर्थ के साथ लिखी गई लेखनी

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  11. कोमल भावो की सुन्दर अभिवयक्ति…..

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!–आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी लगाई है!सूचनार्थ!

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  13. वाह! बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति,समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  14. सुन्दर कविता

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  15. बहुत खुबू ….

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  16. अच्छी गज़ल…प्रेमपगी..

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