जिंदगीनामा


कई तहों में  ज़िन्दगी सिमटती चली जाती है 
जीवन ये ख़ामोशी से सलवटों में समां जाती है 
कल और आज के बीच का बंटवारा हो न सका 
कई टुकडो में ज़िन्दगी को खुरचती  चली जाती है 


तनहा गुज़र-बसर करना है इक नशा जीवन का 
फंदों के अक्स से खेलना है इक नशा प्रीतम का 
टुकड़ों में बँटी ज़िन्दगी को बुनते चले जाते है 
दरख्तों को आंसुओ से भरते चले जाते है 


मद्धिम सी रौशनी है तारो का जमघट है नहीं अब 
चाँद भी छोड़ चूका साथ …उषा का स्वागत है अब 
हर रात चाँद और मै….. रिश्ते बुनते जाते है 
ज़िन्दगी के तहों से सलवटे हटाते जाते है 

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17 responses to this post.

  1. वाह …गहरी सोच

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  2. jindgi ke pahluo ko chhuti hui sundar abhi vyakti

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  3. सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  4. bahut achchi lagi……

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  5. टुकड़ों में बँटी ज़िन्दगी को बुनते चले जाते है दरख्तों को आंसुओ से भरते चले जाते है!प्यारी सी नज़्म !

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  6. संवेदना और कोमलतम अह्सासों से भरपूर बहुत ही बेहतरीन रचना ! बहुत सुन्दर !

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  7. वाह … गहरी नज़्म …गहरे एहसास लिए …

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  8. सुंदर नज़्म ……

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  9. टुकड़ों में बँटी ज़िन्दगी को बुनते चले जाते है दरख्तों को आंसुओ से भरते चले जाते है,,,,वाह !! क्या बात है बहुत ही सुंदर भाव संयोजन से सजी भावपूर्ण अभिव्यक्ति….समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  10. रचना अच्छी लगी। स्वागत।

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  11. कई टुकडो में ज़िन्दगी को खुरचती चली जाती है….सुन्दर अभिव्यक्ति!!!

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  12. आना जी सुंदर अभिव्यक्ति और बहुत सुंदर ब्लॉग …आज ही ज्वाइन कर लिया …!!

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  13. बहुत सुन्दर रचना ..

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  14. मद्धिम सी रौशनी है तारो का जमघट है नहीं अब चाँद भी छोड़ चूका साथ …उषा का स्वागत है अब हर रात चाँद और मै….. रिश्ते बुनते जाते है ज़िन्दगी के तहों से सलवटे हटाते जाते है एक मैं ही जागू ,सारा जग सोये ,हाय जिया रोये ….सुन्दर रचना ….

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  15. jindagi ki salvatte. dil ko chhoo gayee:)behtareen………

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