मंजिल ढूँढती हूँ …..




मंजिल  ढूँढती हूँ 
 रास्तों के सफ़र में 
   ये बाज़ार की भीड़ है 
     मंजिल दिखेगी कहाँ ।।

तन्हाई में भी मैं 
 चल  प ड़ती हूँ गर 
  अँधेरी इस दुनिया में 
    रौशनी है कहाँ  ।।

जहां भी जाती हूँ 
 इस  अंध  जग   में 
   परछाईं भी अपनी 
     पराई सी लगे    ।।  

निशाँ ढूँढती हूँ 
 मंजिल   की  मैं 
   रेतीली ज़मीन है 
    मिलेगी   कहाँ   ।।

आँधियों से लड़ने की
 आदत तो हो गयी 
  पर कदम अब भी –
    ढूँढती  है  तेरे निशाँ   ।। 


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23 responses to this post.

  1. के बारे में महान पोस्ट "मंजिल ढूँढती हूँ ….."

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  2. वाह…सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति…बहुत बहुत बधाई…

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  4. bahut sundar rachna

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  5. निशाँ ढूँढती हूँ मंजिल की मैं रेतीली ज़मीन है मिलेगी कहाँ,,,,,,लाजबाब पंक्तियाँ ,,,,,,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन कविता ,,,,,समर्थक बन गया हूँ,,आप भी बने तो मुझे खुशी होगी,,,,RESENT POST ,,,, फुहार….: प्यार हो गया है ,,,,,,

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  6. सुंदर कविता ।

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  7. बहुत ही बढ़िया सादर

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  8. अंबर में उड़ता फिरे, मनवा ये बिन पाँख। मंजिल नजरों में रहे, खुली रहे बस आँख॥ सुंदर रचना…. सादर।

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  9. sundar shbdo mein apni baat kahi hai….umda..

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  10. बेहद भावपूर्ण…आँधियों से लड़ने कीआदत तो हो गयी पर कदम अब भी -ढूँढती है तेरे निशाँ ।।शुभकामनाएँ.

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  11. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने कल 30/05/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद! '' एक समय जो गुज़र जाने को है ''

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  12. बहुत सुंदर भाव संयोजन से सजी अनुपम रचना।

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  13. उदासी का गहरा एहसास लिए … पर इस निराशा में भी आशा की किरण है ….

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  14. Very nice post…..Aabhar!

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  15. बेहद सुन्दर रचना…

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  16. वाह बहुत खूब

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  17. बहुत ही बेहतरीन रचना….मेरे ब्लॉगविचार बोध पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  18. बहुत सुन्दर

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  19. बेहतरीन अंदाज़….. सुन्दरअभिव्यक्ति…..

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  20. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है! चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

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  21. तन्हाई में भी मैं चल प ड़ती हूँ गर अँधेरी इस दुनिया में रौशनी है कहाँ ।।hai raushani…..yahin hai….bas yahan hi hai raushani…..!

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  22. आँधियों से लड़ने कीआदत तो हो गयी पर कदम अब भी -ढूँढती है तेरे निशाँ ।।श्रेष्ठ कविता………और ये है……………सर्वश्रेष्ठ पंक्तियाँ……

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