आँखों से नींदे बहे रे


















आँखों से नींदे बहे रे 

सपने सजन के कहे रे 
महल सुनहरे ख्वाब का 
बना ले नींद-ए-जहां में 


हवा में उड़े है वो सारे 
नींदों में बसा जो सपना 
क़ैद ख्वाबगाह में कर ले 
हो जायेगा वो अपना 




समय से परे कहीं पर 
सजा ले जहां वहीँ पर 
जमीं पर ख्वाब गिरे तो 
दरक न जाये हसीं पल ।।




आँखों के नींद कहे रे 
चुपके से सुन सजन रे 
सुरों में ढले जो सपने 
जहां सारा सुने रे ।।




पलकों के नीचे  है बसेरा 
फलक तक जाए हर रात 
होंठों को छू ले जो ये 
उजाला होवे सवेरा ।।
Advertisements

19 responses to this post.

  1. gungunati sunder rachnashubhkamnayen

    Reply

  2. मूंद लों पलके ..फिर भी कामना ..तब भी मुंदेगी नहीं |

    Reply

  3. के बारे में महान पोस्ट "आँखों से नींदे बहे रे"

    Reply

  4. बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति … भावनाओं का सागर लिए …

    Reply

  5. बहुत खूब …..

    Reply

  6. आँखों के नींद कहे रे चुपके से सुन सजन रे सुरों में ढले जो सपने जहां सारा सुने रे ।।बहुत सुन्दर

    Reply

  7. सुंदर प्रस्तुति ..

    Reply

  8. सुन्दर प्रस्तुति… आभार।

    Reply

  9. बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति

    Reply

  10. बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,सुंदर रचना,,,,,MY RECENT POST काव्यान्जलि …: बहुत बहुत आभार ,,

    Reply

  11. समय से परे कहीं पर सजा ले जहां वहीँ पर जमीं पर ख्वाब गिरे तो दरक न जाये हसीं पल ।।बहुत सुन्दर ..

    Reply

  12. बहुत सुन्दर…

    Reply

  13. वाह … बेहतरीन

    Reply

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: