धन्य हुई मै


आजन्म संगति की अपेक्षा प्रिये-
गुण–दोषों सहित स्वीकार्य 
हुई हूँ–धन्य हुई मै ,
खींचा है आपके प्रेम ने मुझे 
सींचा है आपने  सपनो को मेरे 
प्रेम की ये परिभाषा 
आपने है सिखाया 
प्रिये ! हमारा अस्तित्व इस 
दुनिया में रहेंगे क़यामत तक 
शपथ है मेरी मै  न जाऊंगी 
रह न पाऊँगी 
देखे बिना आपके एक झलक 
सात जन्मो से बंधी हूँ मै 
आगे सात जन्मो तक 
सात फेरे के बंधन है 
मै न जाऊंगी 
तोड़कर ये बंधन 
प्राण न्योछावर है आप पर 
आपसे ही सीखा है 
प्रेम की परिभाषा 
धन्य हुई मै ।।

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17 responses to this post.

  1. bhut aschi rachna hai.

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  2. ..very beautifully penned Ana, I loved it:)

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  3. prem se bhare sunder bhaavshubhkamnayen

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  4. बढ़िया अभिव्यक्ति …यह रचना कामयाब है !

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  5. भावप्रवण कविता।

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  6. वाह बहुत खूब

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  7. गहन भाव लिए बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  8. प्रेम और समर्पण के भाव लिए … सातों जन्मों कों मुभाते हुवे लाजवाब रचना …

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  9. बहुत सुन्दर भाव संयोजन

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  10. निःस्वार्थ प्रणय,बहुत सुन्दर….!!

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  11. चिर समर्पण का अजस्र प्रवाह

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  12. समर्पण भाव लिये लाजबाब रचना,,,,RECENT POST…: दोहे,,,,

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  13. समर्पण भाव व्यक्त करतीबहुत सुन्दर,प्यारी रचना…:-)

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  14. सुन्दर समर्पण….सात्विक प्रेम….सुन्दर रचनाअनु

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  15. प्रभावित करती रचना .

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