केवल मेरे लिए……











उन आँखों की कशिश को महसूस किया था मैंने 
नर्म प्यार का अहसास था मुझे 
जो गीत गुनगुनाया था तुमने 
वो बोल भी भुलाया न गया मुझसे 
आसमान से जो बूंदे गिरी थी वो 
मुझे छूकर यही कह रही थी 
चलो भीगते हुए उन लम्हों को पकड़ ले 
कहीं छूट न जाये वो बचपन के रिश्ते 










वो पत्थरों से खेलना ….कागज़ की कश्ती 
में खुद को बहाना 
चोर निगाहों से तुम्हारा मुझे निहारना 
दुपट्टे से गीले  बालों को पोंछना 
फिर अगले दिन का वादा लेकर 
आँखों से ओझल हो जाना 
कुछ भी भुलाया नहीं गया मुझसे 










आज फिर से आसमान पिघल रहा  है 
कांच की बूँदें ज़मीन पे बिखरी पड़ी है 
 कागज़ की तमाम कश्तियाँ किनारे 
ढूँढती हुई राह भटक गयी 
वो धूप का कोना भी फिर से सतरंगी हो रहा है 
अक्सर वो धुन जहन में आ जाता  है 
जो तुमने कभी गुनगुनाया था 
केवल मेरे लिए 

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14 responses to this post.

  1. साधुवाद योग्य रचना….

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  2. सुंदर भाव…एक नजर इधर भी…यही तोसंसार है…

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  3. सुंदर रचना….

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18/07/2013 के चर्चा मंच पर है कृपया पधारें धन्यवाद

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  5. बहुत ही खुबसूरत और प्यारी रचना….. भावो का सुन्दर समायोजन……

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  6. आपकी यह रचना कल गुरुवार (18-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  7. दिल को छूते हुए .. गुदगुदाते हुए निकल जाती है ये रचना …बहुत ही गहरे एहसास लिए …

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  8. वाह बहुत खूब

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  9. सुंदर प्रस्तुति…मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 19-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है…आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं…. आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी… मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।जय हिंद जय भारत… मन का मंथन… मेरे विचारों कादर्पण…यही तोसंसार है…

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  10. बहुत कोमल एहसास!

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  11. वो बोल भी भुलाया न गया मुझसे आसमान से जो बूंदे गिरी थी वो मुझे छूकर यही कह रही थी चलो भीगते हुए उन लम्हों को पकड़ ले कहीं छूट न जाये वो बचपन के रिश्ते bahut bhavnatmak .sundar

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  12. बहुत उम्दा,सुंदर सृजन,,,वाह !!!RECENT POST : अभी भी आशा है,

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  13. बहुत सुंदर हृदयस्पर्शी भाव …..

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