वो दिन बारिश के…..












याद है वो दिन बारिश के ?
जब भी निकले- छाते को बंद कर  –
लटकाए से घूमा करते थे –


भींगना था पर पानी में ही नही ,
तुम्हारे साथ बीते हुए पलों के
 बौछारों में –

सनसनाती हवाएं , सोंधी सी 
मिटटी की खुशबू , बताये देती थी ,
मौसम भींगा है –

बहुत देर तक – चुपचाप-जाते हुए 
लम्हों को देखा करते थे – कोशिश थी –
पकड़ने की-

वक्त अपने वक्त के हिसाब से –
वक्त दिखाकर चला गया-हम लम्हों –
को ढूँढ़ते रह गए –

रास्ते अब भी वहीं है –
बारिश के दिनों में भींगती हुई –      
बस दो हाथ अलग हुए ॥ 

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