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कबीर के पद


कबीर माला मनहि कि , और संसारी भीख 
माला फेरे हरी मिले,गले रहट के देख II1II

कबीर जी कहते है कि मन का  माला ही सच्चा होता है बाक़ी तो दिखावा है यदि माला फेरने से ही भगवान् मिलता है तो रहट के गले को देख कितनी बार वो माला फिरती रहती है . अर्थात मन से फ़रियाद करने पर ही इश्वर प्राप्त होता है . 

जहां दया तहां धर्मं है , जहां लोभ तहां पाप,
जहां क्रोध तहां पाप है,जहां क्षमा तहां आप II2II

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय 
माली सींचे सौ घडा , ऋतू आये फल होय II3II

 रे मन चिंता मत कर ! धीरे – धीरे सब कुछ हो जाएगा जिस तरह माली साल भर सौ -सौ घडा पानी पेड़ में देता है पर फल मौसम आने पर ही लगता है . अर्थात सभी कम समय आने पर ही पूरा होगा धैर्य रखना चाहिए 

कबीर के दोहे



माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय ।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।
कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर ॥