Archive for the ‘nazm’ Category

ये धूप की बेला





ये धूप की बेला 
ये छांव सी ज़िन्दगी 
न चांदनी रात 
न सितारों से दिल्लगी 


जमी हूँ मै शिला पर –
बर्फ की तरह 
काटना है मुश्किल 
ये पहाड़ सी ज़िन्दगी 


थम जाती है साँसें
पलकें हो जाती है भारी
भरकर तेरी आहें 
आंसूं बहे है खारी


अनजाने अजनबी तुम 
 जीवन में यूं आये

हसीं ख्वाब मेरे 
तुमने यूं चुराए 

मन की चोर निगाहें 
ढूंढें परछाईं मेरी 
हवाओं की सरसराहट 
पैगाम लाती थी तेरी 

वो भूला सा शख्स 
ये यादों का बज़्म 
तेरी याद में लिख दिया 
ये दर्द भरा नज़्म 




हर पल





हर पल बेहतर था तेरे आने पर 
उम्मीद जग उठी थी तेरे रहने पर 
पर तूने जो जख्म दिया मेरे सीने में
सपने बह गए सारे तेरे जाने पर 


रेत ले गया समंदर मेरे प्यार की 
दफन हो गया एहसास तेरे प्यार की 
ख्वाबो पर अब हक नहीं रहा कोई 
खो दिया मैंने तुम्हे एक बार फिर 


वीरान पड़ी है गली कूचे इस जहां में 
शाम ढल गयी है तेरी याद में  
जाने किस शहर में ढूँढू ठिकाना तेरा 
जी लिया उम्र सारा बेवफा तेरी ख्याल में 

दिल की तरकीब




दिल की तरकीब खास कुछ काम न आ या
न दिल को मिला सुकून न मन को चैन आया


दिल लहूलुहान  हुआ आँखे रो रो कर रात काटे
चाहत आपने ही थी जताई  नाहक हमें बदनाम किया




कदमो को हमने है रोका नज़रों को समेटा है हमने 
ख़त के पुर्जे में भी आखर मिटाया है हमने 


उलझ रही है सीने में कोई नज़्म मिसरा या दोहा 
कोरे कागज़ पर लिखा नाम मिटाया है हमने 


रेत का महल ले डूबा समंदर और अब बारिश की बारी है  
ज़ख्मों का जो सिला दिया तूने वह सिलसिला अब भी जारी है 

  

मुद्दत हुए….




 मुद्दत हुए हाल-ए-दिल 
तुमसे बयान किये हुए 
फुर्सत में,तन्हाई में 
 लम्हें     ढूँढ़ते     हुए 


इश्क-सागर की गहराई 
नापने चली थी मैं 
पर तुम मिले –
गीली रेत पर कदमों के 
निशाँ ढूँढ़ते हुए 


आईने में अपना ही चेहरा 
पराया सा नज़र आया 
चंद भींगे लम्हों को मैंने 
तकिये में है दबाया 



मुद्दत हुई चाँद से 
चंद बातें किये हुए 
 तारों की सरजमीं पे 
रौशनी से नहाते हुए 



रिश्तो को गहराने दो


धीरे धीरे रूहानी  रिश्तो को गहराने दो 
शाख से जुड़े कच्चे  लम्हों को पक जाने दो 


परिंदों का उड़ना ही  था की पर काट दिए 
चिंगारी को ज़रा सा उड़ने की खुमारी दे दो 


लम्हे गिरेंगे शाख से जब पक जायेंगे ये कच्चे पल
संभालना है मुझे तारीखों में बसे पके हुए कल


फिर ये कैसा ठहराव है इस वीरान जिंदगानी में 
इन प्यार के कतरों को दरियाई गहराई दे दो 

कहानी दे गए


जाते हुए एक कहानी दे गए

दर्द-ए-दिल की एक निशानी दे गए
.
दिल में उसके बस जाने की उम्मीद थी
ग़म के दरिया में वो डुबोकर चले गए
.
हवाओं में बसे प्यार की खुशबू भी
जाते-जाते यूं चुराकर ले गए
.
एक अहसान जो उसने कर दिया
प्यासे को आंसूं पिलाकर चले गए
.
अब के आना तो बस इतना करना
शम्मा जलाना ऐसे की बस जलती रहे
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दिल दीवाना


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मैं हूँ और मेरे साथ है मेरा दिल दीवाना
ये भी जालिम कभी  कभी बनता बेगाना


साकिओं मैंखानो में बस तू ही तू है
ख़्वाबों की जहां में भी तेरी आरज़ू है


इस कमबख्त दिल को तूने लूट लिया
रिश्ता  तुमने मुझसे आखिर जोड़ लिया


जाने किस घडी में मैं जो बना दीवाना
तुमने भी उस घडी से नाता जोड़ लिया


अब इस जालिम दिल पर मेरा बस नहीं चलता
तेरा मेरा रिश्ता जाहिर हो ही गया