Archive for the ‘ravindra sangeet’ Category


मेरे गोपन निर्जन ह्रदय में               মোর হৃদয়ের গোপন বিজন ঘরে
अकेले हो तुम नीरव शयन में-             একেলা রয়েছ নীরব শয়ন প’রে-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||            প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
रुद्ध द्वार के बाहर खडी  हूँ मैं              রুদ্ধ দ্বারের বাহিরে দাঁড়ায়ে আমি
कबतक काटेंगे ऐसे दिन प्रिये-           আর কতকাল এমনি কাটিবে স্বামী-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||              প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
रजनी-तारका गगन में है छाया,            রজনীর তারা উঠেছে গগন ছেয়ে,
मेरे वातायन पर मैंने सबकी दृष्टि है पाया     আছে সবে মোর বাতায়ন-পানে চেয়ে-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||             প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
मेरे जीवन को  संगीत से भर दो            জীবনে আমার সঙ্গীত দাও আনি,
वीणा-वाणी को तुम नीरव न रख दो      নীরব রেখো না তোমার বীণার বাণী-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||            প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
मिलायेंगे ये नयन तुम्हारे नयनो के साथ,মিলাবো নয়ন তব নয়নের সাথে,
दूँगी तुम्हारे हाथों में ये हाथ-             মিলাবো এ হাত তব দক্ষিণহাতে-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||             প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
हृदयपात्र होगा अमृत से पूर्ण ,       হৃদয়পাত্র সুধায় পূ্র্ণ হবে,
गहरे प्रकाश-ध्वनि से तिमिर थर्थरायेगा তিমির কাঁপিবে গভীর আলোর      
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||                                               রবে-
                                                              প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।

Advertisements

उन पुराने दिनों…….ravindra sangeet


उन पुराने  दिनों  की बातें हाय कैसे भूल पाओगे                              পুরানো সেই দিনের কথা ভুলবি কি রে হায়।
वो आँखों में झांकना ,दिल की बातें करना वो  कैसे भूल पाऊँ           ও সেই চোখে দেখা, প্রাণের কথা, সে কি ভোলা যায়।
आओ और एकबार आओ हे सखा ह्रदय में समा जाओ                 আয় আর একটিবার আয় রে সখা, প্রাণের মাঝে আয়।
हम सुख-दुःख की बातें करें जी भर कर आओ                              মোরা সুখের দুখের কথা কব, প্রাণ জুড়াবে তায়।
वो  हमारा  भोर बेला में फूल चुनना , झूला झूलना                         মোরা ভোরের বেলা ফুল তুলেছি, দুলেছি দোলায়–
बकुल के पेड़ के नीचे बंसी बजाकर  गाना सुनाना                              বাজিয়ে বাঁশি গান গেয়েছি বকুলের তলায়।
फिर कुछ दिनों के लिए हुए  अलग गए कौन कहाँ                            হায় মাঝে হল ছাড়াছাড়ি, গেলেম কে কোথায়–
अब फिर से हम मिले हैं सखा आओ प्राण में समा जाओ                     আবার দেখা যদি হল, সখা, প্রাণের মাঝে আয়॥

तुम्हे नहीं मिला मेरा परिचय – ravindra sangeet


Get this widget | Track details | eSnips Social DNA
तुम्हे नहीं मिला मेरा परिचय 

जानो जिसे तुम वो नहीं हूँ मैं  

जो माला पहनाया तुमने ,सूखे वो पल पल में 

प्रकाश भी सहमा जाय ,

वायु-स्पर्श भी न सहा जाय ,


आओ-आओ विषाद जलाओ शिखा 


मेरे मस्तक में लगाओ अग्निमयी टीका 


मरण आये चुपके से परम प्रकाश रूप में 


सभी आवरण से हो जाऊं  मुक्त 


और सभी पराजय का हो जाय अंत ||



তুমি মোর পাও নাই পরিচয়।
তুমি যারে জান সে যে কেহ নয়, কেহ নয়॥
মালা দাও তারি গলে, শুকায় তা পলে পলে,
আলো তার ভয়ে ভয়ে রয়–
বায়ুপরশন নাহি সয়॥

এসো এসো দুঃখ, জ্বালো শিখা,

দাও ভালে অগ্নিময়ী টিকা।

মরণ আসুক চুপে পরমপ্রকাশরূপে,

সব আবরণ হোক লয়–

ঘুচুক সকল পরাজয়॥

प्यार है मुझे-ravindra sangeet



ভালোবাসি, ভালোবাসি–
এই সুরে কাছে দূরে জলে স্থলে বাজায় বাঁশি॥
আকাশে কার বুকের মাঝে ব্যথা বাজে,
দিগন্তে কার কালো আঁখি আঁখির জলে যায় ভাসি॥
সেই সুরে সাগরকূলে বাঁধন খুলে
অতল রোদন উঠে দুলে।
সেই সুরে বাজে মনে অকারণে
ভুলে-যাওয়া গানের বাণী, ভোলা দিনের কাঁদন-হাসি॥




प्यार है मुझे 
दूर या पास जल-स्थल इन्हीं  स्वरों में  बजे  बंशी 

वो आकाश में किसके ह्रदय में व्यथा बजे 
दूर दिगंत में किसके काली आँखों से आंसूं बहे ||

उस सुर-सागर के किनारों का बंधन तोड़कर 
अतल  रूदन बाहर आया झूमकर 

उन सुरों में अकारण ही मेरे मन में बजे 
भूला हुआ संगीत के स्वर ,और भूले हुए क्रंदन -हँसी 


रविन्द्र संगीत – दाडिये आछो


দাঁড়িয়ে আছ তুমি আমার গানের ও পারে–
আমার সুরগুলি পায় চরণ, আমি পাই নে তোমারে ।
বাতাস বহে মরি মরি, আর বেঁধে রেখো না তরী–
এসো এসো পার হয়ে মোর হৃদয়মাঝারে…….

তোমার সাথে  গানের  খেলা  দুরের  খেলা  যে ,
বেদনাতে বাঁশি বজায় সকল বেলা যে .
কবে নিয়ে আমার বাঁশি বাজাবে গো আপনি আশি ;
আনন্দময় নিরব রাতের নিবিড় আঁধারে .

দাঁড়িয়ে আছ তুমি আমার গানের ও পারে–


আমার সুরগুলি পায় চরণ , আমি পাই নে তোমারে . 

দাঁড়িয়ে আছ তুমি আমার গানের ও পারে–
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx


मेरे संगीत के उस पार आप है खड़े 
मेरे सुरों को मिला है आपका चरण स्पर्श पर 
आप मुझको नहीं मिले 

तुम्हारे साथ गीतों से क्रीडा 
जो है दूर का खेल
वेदना से भरे मन से 
बंशी बजे सुबह-शाम रे 

कब मेरी बंशी को लेकर 
आपही छेड़ेंगे आकर 
वो नीरव रात के निबिड़ अँधेरा भी 
आनंदमय होगा रे 



आमार मुक्ति आलोय आलोय


আমার মুক্তি আলোয় আলোয় এই আকাশে,
আমার মুক্তি ধুলায় ধুলায় ঘাসে ঘাসে॥
দেহ মনের সুদূর পারে হারিয়ে ফেলি আপনারে,
গানের সুরে আমার মুক্তি উর্ধ্বে ভাসে॥
আমার মুক্তি সর্বজনের মনের মাঝে,
দুঃখ বিপদ তুচ্ছ করা কঠিন কাজে।
বিশ্বধাতার যজ্ঞশালা, আত্মহোমের বহ্নি জ্বালা
জীবন যেন দিই আহুতি মুক্তি আশে॥


आमार मुक्ति आलोय आलोय  एई आकाशे

आमार मुक्ति धूलाय  

धूलाय घासे घासे 



देह मोनेर सुदूर पारे  हारिये फेली आपोनारे 
गानेर सूरे आमार मुक्ति उर्ध्वे भासे 

आमार मुक्ति सर्ब्बोजोनेर मोनेर माझे 
दू:ख बिपद तुच्छ कोरा कोठीन काजे 

बिश्वधातार यज्ञशाला,आत्म होमर बह्निजाला 
जीबों जानो दी आहुति मुक्ति आशे 


उपरोक्त गाने का आशय को अक्षुण रखते हुए अनुवाद करने की कोशिश करती हूँ :

आलोक से भरा इस आकाश में ही मेरा मोक्ष है छिपा 
इन धुल कणों में ,इन तृणों में मेरा मुक्ति है छिपा 

देह मन के  सुदूर छोर है जहां 
मन मेरा खो जाता है वहां 
इन गीतों के सुरों के उर्ध्व में मेरी मुक्ति है छिपा 

मेरी मुक्ति सर्वजनो के ह्रदय में है छिपा 
दू:ख विपद को तुच्छ करता हुआ कठिन कामो में है बसा 

विश्व विधाता के यज्ञशाला में 
आत्मा होम के अग्निशाला में 
मै अपने जीवन की आहुति दे दूं 
मुझे मुक्ति मिल जाए  


Phoole Phoole Dhole Dhole-(ravindra sangeet)