Archive for the ‘stuti’ Category

स्तोत्र गान


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chaturbhujam…a r rahman


दुर्गा पूजा की हार्दिक शुभकामनाये


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durga stuti.mp3

प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
तृतीयं चन्द्रघन्टेइति कुष्मान्डेइति चतुर्थकम                                           
पंचमं स्कन्दमातेइति षष्ठं कात्यायनी तथा
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीतिचाष्टमम
नवमं सिद्धिदात्रीति नवदुर्गा प्रतीर्तिता
उत्तिन्ना तारिण वाणि ब्रह्मनैव महात्मना

जन्माष्टमी की शुभकामनाये ……….



सदा सर्वात्मभावेन भजनीयो व्रजेश्वर:
करिष्यति स एवास्मदैहिकं पारलौकिकम  (1)

अन्याश्रयो न कर्त्तव्य: सर्वथा बाधकस्तु स:
स्वकीये स्वात्मभावश्च  कर्त्तव्य: सर्वथा सदा (2)

 सबके आत्मा रूप से व्याप्त भगवान श्री कृष्ण का ही सदैव भजन करना चाहिए , वो ही हमलोगों के लौकिक पारलौकिक लाभ सिद्ध करंगे (1) दूसरे का आश्रय नही लेना चाहिए क्योंकि वह सर्वदा बाधक होता है;सदा स्वावलंबी  होकर आत्मभाव का पालन करना चाहिए (2}

जन्माष्टमी की शुभकामनाये …………….


सदा सर्वात्मभावेन भजनीयो व्रजेश्वर:
करिष्यति स एवास्मदैहिकं पारलौकिकम  (1)

अन्याश्रयो न कर्त्तव्य: सर्वथा बाधकस्तु स:
स्वकीये स्वात्मभावश्च  कर्त्तव्य: सर्वथा सदा (2)

 सबके आत्मा रूप से व्याप्त भगवान श्री कृष्ण का ही सदैव भजन करना चाहिए , वो ही हमलोगों के लौकिक पारलौकिक लाभ सिद्ध करंगे (1) दूसरे का आश्रय नही लेना चाहिए क्योंकि वह सर्वदा बाधक होता है;सदा स्वावलंबी  होकर आत्मभाव का पालन करना चाहिए (2)